Draupadi Murmu Biography in Hindi | द्रौपदी मुर्मू जीवन कहानी 2022

Draupadi Murmu Biography in Hindi : इस दुनिया के लोक तांत्रिक देश भारत और इस विशालकाय भारत का सबसे बड़ा पद राष्ट्रपति जिसके लिए चुनी गई इस देश के एक आदिवासी परिवार की बेटी द्रौपदी मुर्मू “ मैं एक गरीब परिवार से हूं मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं राजनीति में आऊंगी मैं सिर्फ चाहती थी कि कुछ पढ़ाई लिखाई करके नौकरी करके अपने परिवार को सपोर्ट करूंगी लेकिन मेरी लाइफ में इतने उतार-चढ़ाव आए जिनके चलते मैं कब राजनीति में आ गई पता ही नहीं चला.” यह शब्द थे द्रौपदी मुर्मू के.

दोस्तों यदि आपकी जिंदगी बिना रुकावट के और बिना challenges के  गुजर रही है तो शायद आप गलत रास्ते पर चल रहे हैं क्योंकि मुश्किलो की सवारी करके इतिहास रचा जाता है यह बात सच कर दिखाई है द्रौपदी मुर्मू भारत के इतिहास में 25 जुलाई 2022 तारीख बन गई है इस दिन भारत में पहली बार किसी आदिवासी परिवार की महिला ने देश के राष्ट्रपति रूप में शपथ ली.

समाज के कई परंपराओं को तोड़ा और दोस्तों उन दिनों एक लडकी के गांव से बाहर जाकर पढ़ाई करना भी मुश्किल था. कम उम्र में ही शादी करा दी जाती थी और द्रोपती के लिए भी सबसे बड़ा challege था.और गाव के लोग उन्हें सलाह दिया करते थे की उन्हें बाहर ना जाने दिया करे. हलाकि उनके पिता ने उनका भरपूर साथ दिया.

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 द्रौपदी मुर्मू जी राष्ट्रपति चुने जाने वाली दूसरी महिला है क्योंकि उनसे पहले श्रीमती प्रतिभा पाटिल देश की पहली महिला राष्ट्रपति बनी थी हां लेकिन एक आदिवासी परिवार से वह इस पद को संभालने वाली पहली महिला है राष्ट्रपति चुनाव में द्रौपदी मुर्मू NDA के उम्मीदवार थी वहीं विपक्ष की तरफ से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा थे जो भारतीय राजनीति के एक दिग्गज खिलाड़ी रहे. वो दो बार प्रदेश के वित्त मंत्री और एक बार विदेश मंत्री रह चुके हैं. जबकि द्रौपदी मुर्मू का राजनीतिक कैरियर यशवंत सिन्हा जितना बड़ा नहीं रहा लेकिन बावजूद इसके उन्हें हराने में कामयाब रही. 

जबकि राष्ट्रपति बनने के साथ आदिवासी समुदाय के लोगों के साथ स्वर्ण युग की शुरुआत हो गई है उनके आदिवासी विकास में कितना बदलाव आएगा यह तो पता नहीं लेकिन इतना जरूर है कि आदिवासी महिला का देश के लाखो लोगो के लिए एक प्रेरणा बन गया है. जो भेदभाव और बेसिक सुविधाओं के अभाव में अक्सर आगे नहीं बढ़ पाते थे लेकिन यहां सवाल यह है कि एक आदिवासी महिला आखिरी यहां तक पहुंची कैसे-कैसे एक महिला ने गांव से निकलकर भारतीय राजनीति में अपनी पहचान बनाई इस सवालों के साथ-साथ यह भी जानेंगे कि उनका बचपन कैसा था उनके सामने में कौन-कौन था उनके जीवन के सारे उतार-चढ़ाव जिसने उन्हें इतना मजबूत बना दिया कि वह भारत के सबसे बड़े पद पर पहुंच पाई है  

दोस्तों इस लेख में बताई गई जानकारी बहुत से अलग-अलग सोर्सेस से ली गई है जैसे newspaper, Article, Google Search and videos इत्यादि.

द्रौपदी मुर्मू  का बचपन | Draupadi Murmu Biography

इस गांव की खुशी अलग थी क्योंकि यह कोई और गांव नहीं बल्कि द्रौपदी मुर्मू का घर उनका जन्म स्थान बैदापोसी गांव था जो उड़ीसा राज्य के मयूरभंज जिले में पड़ता है. 20 jun 1958 को इसी गांव में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का जन्म हुआ था. द्रोपदी संथाल आदिवासी समुदाय से विलोंग करती थी. और यह वही आदिवासी समुदाय है जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ 1855 में विद्रोह किया था. आदिवासी जनजाति वैसे झारखंड की प्रमुख अनुसूचित जनजाति है और यही उनकी जनसंख्या सबसे ज्यादा भी है लेकिन झारखंड के अलावा बिहार उड़ीसा पश्चिम बंगाल असम और मध्य प्रदेश में भी इस जनजाति के लोग रहते हैं. ( द्रोपति मुर्मू का जीवन परिचय)

गांव की आबादी 3500 लोगों की है यह गांव झारखंड की सीमा से कुछ किलोमीटर दूर है और इस गांव से कुछ दूरी पर लौह अयस्क  और कोयले की खदानें भी है और पहाड़ तालाब नदी है जिस गांव की खूबसूरती को निहारते हैं देश के दूसरे गांव की तरह है यहां के लोगों की अपनी परेशानियां अपनी जरूरत है दूसरे गांव की तरह यहां के लोगों के दिन की शुरुआत सुबह सूरज उगने के साथ ही शुरू हो जाती है और शाम ढलते ही लोग रात के खाने की तैयारी करने लग जाते हैं लेकिन एक बात है जो इस गांव को दूसरे गांव से अलग बनाती है और वह यह कि इस गांव की बेटी अब देश की राष्ट्रपति बन गई है.

उनका जन्म जिस घर में हुआ उसकी छत खपरैल की थी की थी अब घर वालों ने पीले रंग का पक्का मकान बनवा लिया है लेकिन घर के कुछ कमरे अभी भी उसी हालत में है जिन्हें शायद आज भी ऐसा आखिर छोड़ा गया है ताकि द्रौपदी मुर्मू जब भी आएं उन्हें उनका बचपन याद आ जाए इस घर में भाई का परिवार रहता है जिन्होंने अपने Interview में बताया उसी रूप में रखे हुए हैं जैसे वह था ताकि द्रौपदी की यादें ही रह जाती है. तो उन्हें अपने पुराने घर को देख कर खुशी होती है उन्हें खाने में और आलू का चोखा बहुत पसंद है आज गांव में फिर भी बहुत सुख सुविधाएं हैं लेकिन उस समय इतनी सुविधाएं नहीं हुआ करती थी बस लोगों को दो वक्त का खाना मिल जाए वही उनके लिए काफी था.

इस गांव में बिजली तक हालांकि कुछ सालों में आई है इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं इन हालातों में गुजरा होगा ऐसे थे जिनके पास धन नहीं थी लेकिन गांव में काफी मान सम्मान था द्रौपदी के पिता और दादा दोनों ही गांव के सरपंच रहे थे इसलिए उनके हालात भी बाकी लोगों से थोड़े बेहतर उनके पिता और दादा के पास अपनी समस्याएं लेकर आया करते थे द्रौपदी के मन में भी समाज के लोगों के लिए कुछ करने की इच्छा जागी है लेकिन उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह कभी Politics  में Entry करेंगी.

ऐसा इसलिए क्योंकि उस समय एक लड़की का पढ़ना लिखना ही बहुत बड़ी बात हुआ करती थी और वह भी अगर वह लड़की एक आदिवासी जनजाति की हो तो उसके लिए तो यह संघर्ष और भी बढ़ जाता था पर समाज के बेड़िया द्रौपदी के सपनों को कहां रुकने वाले थे माता-पिता का साथ मिला.

द्रौपदी मुर्मू की शिक्षा | Education of Draupadi Murmu

द्रोपति मुर्मू का जीवन परिचय: द्रौपदी ने अपने गांव के ही सरकारी स्कूल से अपनी पढ़ाई की थी. जिस समय वह स्कूल में पढ़ा करती थी तब यहां पर आज की तरह बच्चों के बैठने के लिए पक्की बिल्डिंग नहीं बल्कि कच्ची मिट्टी से बनी इमारत हुआ करती थी जिसमें गांव के बच्चे पढ़ा करते थे. देश के दूसरे ग्रामीण स्कूलों की तरह यहां भी बच्चे दरी पर बैठकर पढ़ा करते थे तो कभी क्लास बाहर पेड़ के नीचे लगती थी. लेकिन द्रौपदी मुर्मू के लिए यही बड़ी बात थी कि वह स्कूल पढ़ पा रही है. 

क्योंकि गांव की कई लड़कियां तो ऐसी थी जिनके लिए स्कूल जाना बस एक ख्वाब था उनके एक दोस्त ने मीडिया को दिए अपने इंटरव्यू में बताया कि वह स्कूल में सबसे होशियार थी साथ ही बहुत नेक दिल भी उस समय बहुत सारे बच्चे गरीबी की वजह से बीच में ही पढ़ाई छोड़ दिया करते थे. उनके घर के हालात ठीक नहीं थे तो इस लिए उन्होंने भी स्कूल छोड़ दिया.  

Draupadi Murmu President ने अपनी Primery की पढ़ाई अपने गांव के ही Goverment School  से की लेकिन माध्यमिक शिक्षा के लिए गांव में तो क्या गांव से कई किलोमीटर दूर तक स्कूल मौजूद नहीं था. इसलिए ज्यादातर माता-पिता 5th के बाद अपने बच्चों को नहीं पढ़ाते थे. लेकिन द्रौपदी आगे पढ़ना चाहती थी. और उनके माता-पिता ने भी उनका साथ दिया वह पढ़ने के लिए घर से कई किलोमीटर दूर ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर आ गई. जो समय माध्यमिक शिक्षा और उच्च शिक्षा के लिए पूरे केंद्र था. 

इस लिए Draupadi murmu Career बनाने के लिए आदिवासी स्कूल में एडमिशन ले लिया और Hostal में रहने लगी वह अपने गांव की पहली लड़की थी. जो ग्रेजुएशन करने घर से दूर भुवनेश्वर गई थी. उस समय ज्यादातर लड़कियों को पढ़ने नहीं दिया जाता था इसलिएSchool में बहुत कम लड़कियां हुआ करती थी. और इन लड़कियों को उनके माता-पिता ने बड़ी उम्मीदों के साथ यहां पर भेजा था. उनके साथियों की मानें तो वह स्कूल के दिनों में भी बहुत ही ज्यादा सरल स्वभाव की थी. जिसे भी मदद की जरूरत पड़ती वह हमेशा सबसे पहले आगे बढ़कर मदद करती थी. उन्हें music का थोड़ा बहुत शौक था. लेकिन ज्यादातर समय पढ़ाई में गुजरता माध्यमिक शिक्षा पूरी होने के बाद ग्रेजुएशन भी करना चाहती थी. 

उस समय ओडीशा भी इतना Develop नहीं हुआ था. इसलिए यहां पर कॉलेज इसमें तो स्कूल से भी कम लड़कियां नजर आती थी. हालाकी कॉलेज था जहां उसे में लड़कियों की संख्या सबसे ज्यादा थी इस कॉलेज का नाम था Rama Devi Woman Collage. इसी कॉलेज से द्रौपदी मुर्मू ने बीए की और पढ़ाई के समय किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि कॉलेज में पढ़ने वाली एक साधारण सी छात्रा एक दिन देश की राष्ट्रपति बनेंगी.

द्रौपदी मुर्मू ने लाइफ में क्या खोया क्या पाया | Draupati Murmu Family History

कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही उनकी मुलाकात Shyam charan murmu से हुई. धीरे-धीरे दोनों की मुलाकातें बढ़ने लगी और दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई थी. जल्द ही उनकी यह दोस्ती प्यार में बदल गई उस समय श्याम चरण भी भुवनेश्वर के हैं Collage में पढ़ाई कर रहे थे. पढ़ाई पूरी करने के बाद द्रौपदी और श्याम ने शादी के बारे में सोचा परिवार की रजामंदी के लिए श्याम चरण द्रौपदी का हाथ मांगने उनके घर पहुंच गए श्याम चरण के कुछ रिश्तेदार द्रौपदी के गांव में ही रहते थे ऐसे में अपनी बात रखने के लिए वह अपने चाचा और कुछ रिश्तेदारों को लेकर द्रौपदी के घर गए थे.

लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद द्रौपदी के पिता बिरंचि नारायण टुडू ने इस रिश्ते को लेकर मना कर दिया था. पर श्यामचरण भी पीछे हटे उन्होंने तय कर लिया था कि अगर वह शादी करेंगे तो सिर्फ द्रौपदी से. वही द्रौपदी ने भी घर पर साफ कह दिया कि वह श्याम चरण के अलावा किसी और से शादी नहीं करेंगी लेकिन कई कोशिशों के बाद भी जब परिवार नहीं माना तो श्यामचरण ने 3 दिन तक द्रौपदी के गांव में ही डेरा डाल दिया आखिर में थक हार कर द्रौपदी के पिता ने इस रिश्ते को मंजूरी दे दी |

शादी के लिए द्रौपदी के परिवार की मंजूरी मिल चुकी थी अब श्याम चरण और द्रौपदी के घर वाले दहेज की बातचीत को लेकर बैठे उस समय संथाल जाति में परंपरा थी कि लड़की को शादी में कुछ जानवर और कपड़े दिए जाते थे ताकि वह अपने अपने जीवन की शुरुआत बिना किसी समस्या के कर सकें तो फिर भी इस परंपरा को पूरा कर सकते थे लेकिन गरीब परिवारों को जानवर खरीदने के लिए धन जुटाने में दिक्कत आती थी ऐसे में काफी बातचीत के बाद तय हुआ कि द्रौपदी को शादी में एक गाय, बैल और 16 जोड़ी कपड़े दिए जाएंगे.

जिस पर दोनों के परिवार सहमत हो गए कुछ दिन बाद शाम से द्रौपदी का विवाह हो गया था शादी के बाद द्रौपदी की life काफी खुश हाल चल रही थी. और जल्द ही वह माता-पिता भी बन गए द्रौपदी के 4 बच्चे हुए दो बेटे और दो बेटियां लेकिन उनकी खुशी ज्यादा समय तक टिक्की थी उनकी पहली बेटी जन्म के कुछ समय ही चल बसी जिसके बाद से द्रौपदी काफी टूट गई लेकिन अपने बाकी बच्चों के लिए उन्होंने खुद को संभाला और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गई.

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2009 में उनके बेटे Laxman Murmu की अचानक मौत हो गई उस समय लक्ष्मण की उम्र 25 साल थी बताया जाता है कि उनका बेटा लक्ष्मण अपने चाचा चाची के साथ रहता था वही जब उनके बेटे की मौत हुई उस समय द्रौपदी रायरंगपुर में थी लक्ष्मण शाम को अपने दोस्तों के साथ घूमने गया था और देर रात एक ऑटो से उसके कुछ दोस्त उसे घर छोड़ने आए जब लक्ष्मण घर पर पहुंचा तो उसकी हालत ठीक नहीं थी. चाचा चाची के कहने पर दोस्तों ने लक्ष्मण को उसके कमरे में लेटा दिया उस समय घर वालों को लगा कि थकान की वजह से ऐसा हुआ है लेकिन सुबह जब काफी देर होने के बाद भी लक्ष्मण अपने कमरे से बाहर नहीं आया तो घर वालों को शक हुआ और उन्होंने कमरे में जाकर देखा कमरे में लक्ष्मण चार पाई  पर बेजान पड़ा था. 

उसके शरीर को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वह बेहोश हो लक्ष्मण की ऐसी हालत देख घर वाले डर गए उन्होंने द्रौपदी मुर्मू को फोन लगाया और उसे Hospital लेकर गए लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी अस्पताल में डॉक्टर ने बताया कि उसकी मौत हो चुकी है. बेटे की अचानक मौत की खबर से द्रौपदी सदमे में आ गई और एक जवान बेटे को खोने के बाद उन्हें अंदर ही अंदर तोड़ दिया अब वह पहले जैसी नहीं रही थी.

उन्होंने लोगों से बात करना और मिलना जुलना बहुत कम कर दिया और जैसे ही उन्होंने अपने बेटे के हमसे भरना शुरू किया उन पर दो मिलना बहुत कम कर दिया और जैसे ही उन्होंने अपने बेटे के हमसे भरना शुरू किया उन पर दुखों के और पहाड़ टूट पड़े साल 2013 में एक सड़क दुर्घटना के दौरान द्रौपदी के दूसरे बेटे की भी मौत हो गई 4 साल के अंदर दो बेटों को खोने के गम से द्रौपदी पूरी तरह से टूट चुकी थी. पर फिर भी द्रौपदी में हिम्मत बाकी थी इसलिए उन्होंने किसी तरह अपने आप को संभाल लिया.

लेकिन उनके पति ऐसा ना कर सके और बेटे की मौत के कुछ समय बाद उनके पति की भी हार्ट अटैक से मौत हो गई.

आज आपने क्या जाना :

दोस्तों द्रौपदी मुर्मू के बारे में जितनी बात की जाए उतनी कम है लेकिन इस लेख के माध्यम से हमने आज आपको द्रोपति मुर्मू का जीवन परिचय के बारे में और द्रोपती मुर्मू की शिक्षा साथ में द्रौपदी मुर्मू फैमिली हिस्ट्री के बारे में विस्तार पूर्वक आपको बताया गया है उम्मीद करता हूं कि द्रोपति मुर्मू की जीवन परिचय के बारे में पढ़कर आप भी कुछ Motivate हुए होंगे.

 दोस्तों यह लेख आपको पसंद आया होगा तो इसे शेयर जरूर करें साथ में आपको द्रोपति मुर्मू के बारे में जानकारी है तो मैं कमेंट करके जरूर बताएं हम इस आर्टिकल के अंदर जरूर add करेंगे.

FAQ:

द्रौपती मुर्मू कोन है?

वर्तमान में भारत की प्रथम आदिवासी महिला राष्ट्रपति है.

द्रौपती मुर्मू का गाँव कोनसा है ?

द्रौपदी मुर्मू का घर उनका जन्म स्थान बैदापोसी गांव था जो उड़ीसा राज्य के मयूरभंज जिले में पड़ता है.

द्रौपती मुर्मू कोनसे समुदाय से है?

आदिवासी समुदाय से है

द्रौपती मुर्मू के पति का क्या नाम था?

श्याम चरण मुर्मू

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